हिंदी सुविचार
“भारत भूमि को माँ मानकर राष्ट्रहित में निःस्वार्थ समर्पण ही राष्ट्र-सुख है और राष्ट्र-सेवा में मिलने वाला आनंद ही परम आनंद है।”
✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात् (सम्पूर्ण धरती ही मेरा परिवार है) का संदेश देने वाली संस्कृति केवल भारत की संस्कृति है।”
✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
“ऋषियों का चिंतन और वेदों का ज्ञान ही हमारे अध्यात्म की वास्तविक पहचान है।”
✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
केवल पढ़ना-लिखना ही शिक्षा नहीं है,
जो हमें हमारे पूर्वजों के अनुभवों का ज्ञान देता है,
उसे शिक्षा कहते हैंयदि कोई व्यक्ति अपने धर्म से अनभिज्ञ है,
तो वह उस पर गर्व कैसे कर सकता है?
✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
भारतीयता
भारत को जानना, मानना और अपनाने से जन्म लेती है।
यह हमें वसुधैव कुटुम्बकम् की शिक्षा देती है,सर्वे भवन्तु सुखिनः का ज्ञान देती है,
विश्व की सेवा से जोड़ती है और निस्वार्थ कर्मयोगी बनने की प्रेरणा देती है।
— यही सच्ची भारतीयता है।
✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
“ऐसे स्वप्न देखो कि संसार उन्हें असंभव कहे; क्योंकि इतिहास आराम से नहीं, साहस और संघर्ष से बनता है।”
“सफलता का मूल्य है—कठोर परिश्रम, चुनौतियों का सामना, पीड़ा का धैर्यपूर्वक स्वीकार और भोग-विलास का त्याग।”
“जब तक संघर्ष चलता है, लोग उपहास करते हैं; सफलता मिलते ही वही लोग आपकी प्रशंसा करते हैं।”
“अनुशासन वह सेतु है, जो स्वप्नों को वास्तविकता से जोड़ता है।”
“उठो, कर्म करो और अपनी क्षमताओं का ऐसा प्रमाण दो कि सफलता स्वयं तुम्हारा परिचय बन जाए।”
✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
” परिवर्तन ही इस ससांर का नियम हैं।”
✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
“पद बड़ा हो या छोटा, पहचान हमेशा काम से बनती है।
ईमानदारी से किया गया प्रयास और जनता के
प्रति समर्पण ही इंसान को असली सम्मान दिलाता है।”✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
काम ही आराम है।
डॉ.राजेंद्र पैंसिया
कर्मचारी नहीं कर्मयोगी बने।
डॉ.राजेंद्र पैंसिया
काम से ही नाम होगा।
डॉ.राजेंद्र पैंसिया
करने से होता है।
डॉ.राजेंद्र पैंसिया
करने से ही होता है।
डॉ.राजेंद्र पैंसिया
“भारत को जानो,
भारत को मानो,
भारतीय बनो।”✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
सुख चाहत जो जीव है, विद्या उससे दूर।
विद्या चाहत जो जन, त्यागे सुख भरपूर॥✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया
सर्वदेवमयी पूज्य माता, सब सुखों की दाता है,
जिस घर में होती गो-सेवा, वह धाम पावन हो जाता है।✍️ — डॉ. राजेंद्र पैंसिया

